Friday, May 15, 2020
सदैव ही सूर्य के तेज से प्रभावित
जय श्री गणेश
आत्मा के मूल में दिव्य तेज का अथाह सागर है
जो सूर्य अग्नि से प्रकाशित है व् सदैव ही सूर्य के तेज से प्रभावित रहता है
आत्मा का स्वरुप प्रकाशमय माना गया है
पर माया की छाया के अधीन यह निज गति से भिन्न अन्यथा गति के वशीभूत रहता है
जहा निज तेज से भिन्न सांसारिक तेज की गति से जीवन यात्रा को रूप देता है
सजग स्वरुप में आत्मा निज गति धारण कर आत्म साक्षात्कार कर पुनः निज गति को प्राप्त है
और वस्तुतः मूल कारण हेतु प्रयास कर निज स्वरुप तक पहुँचता है
जहा नित्य सत्य की अनुभूति इसे परमानन्द गति प्रदान करती है
परमात्मा सभी पर कृपा करे
कृपया धन्यवाद