Friday, May 15, 2020
वायु व् जल
जय श्री गणेश
पृथ्वी पर जीव वायु व् जल में मूलतः जीवन यापन करते है
मानव का यहाँ अहम् व्यक्तित्व है जिसे पर्यावरण हेतु सावधानी से कर्म करने का प्रावधान है
पर मानव कर्म से जल व् वायु की शुद्धि सर्वाधिक प्रभावित हुई है
पृथ्वी पर इसी कारण से अदृश खतरों की वृद्धि हुई है जीवाणु व् विषाणु इसी के अंग है
जो धरा पर जीवन के लिए एक खतरा बन रहे है,
विशुद्ध जल व् विशुद्ध वायु जीवन में रोग प्रतिरोधक शक्ति पैदा करती है
समय रहते मानव को अपनी भूल में सुधार करना होगा
अन्यथा इसका परिदृश्य सिर्फ व् सिर्फ दुखत होगा
परमात्मा सभी पर कृपा करे
कृपया धन्यवाद