जिस मन में ऋग्वेद की ऋचाएं व सामवेद व यजुर्वेद के मंत्र उसी प्रकार स्थापित हैं, जैसे रथ के पहिए की धुरी से तीलियां जुड़ी होती हैं जिसमें सभी प्राणियों का ज्ञान कपड़े के तंतुओं की तरह बुना हुआ होता है, ऐसा मेरा मन शुभ अतार्थ शिव संकल्प युक्त हो
Monday, September 5, 2022
शिव संकल्प
जिस शाश्वत मन द्वारा भूत,भविष्य व वर्तमान काल की सारी वस्तुएं सब ओर से ज्ञात होती हैं और जिस मन के द्वारा सप्तहोत्रिय अतार्थ सात ब्राह्मणों द्वारा किया जाने वाला यज्ञ किया जाता है, ऐसा मेरा मन शुभ अतार्थ शिव संकल्प युक्त हो
शिव संकल्प
जो मन ज्ञान, चित्त व धैर्य स्का स्वरूप है तथा अविनाशी आत्मा से युक्त इन समस्त प्राणियों के भीतर ज्योति स्वरूप विद्यमान है, ऐसा मेरा मन शुभ अतार्थ शिव संकल्प युक्त हो
शिव संकल्प
जिस मन की सहायता से ज्ञानीजन कर्मयोग की साधना में लीन यज्ञ,जप,तप करते हैं,वह जो सभी जनों के शरीर में विलक्षण रुप से स्थित है, ऐसा मेरा मन शुभ अतार्थ शिव संकल्प युक्त हो
शिव संकल्प
वह दिव्य ज्योतिमय शक्ति, वह मन जो हमारे जागने की अवस्था में बहुत दूर तक चला जाता है, और हमारी निद्रावस्था में हमारे पास आकर आत्मा में विलीन हो जाता है,वह प्रकाशमान स्रोत जो हमारी इंद्रियों को प्रकाशित करता है, ऐसा मेरा मन शुभ अतार्थ शिव संकल्प युक्त हो
शिवसङ्कल्पमस्तु
यस्मिन्नृचसामयजूंषियस्मिन्प्रतिष्ठितारथनाभाविवारायस्मिंश्चित्तंसर्वमोतंप्रजानांतन्मेमनःशिवसङ्कल्पमस्तु
शिवसङ्कल्पमस्तु
येनेदंभूतंभुवनंभविष्यत्परिगृहीतममृतेनसर्वम्येनयज्ञस्तायतेसप्तहोतातन्मेमनःशिवसङ्कल्पमस्तु
शिवसङ्कल्पमस्तु
यत्प्रज्ञानमुतचेतोधृतिश्चयज्ज्योतिरन्तरमृतंप्रजासुयस्मान्नऋतेकिनकर्मक्रियतेतन्मेमनःशिवसङ्कल्पमस्तु
शिवसङ्कल्पमस्तु
येनकर्माण्यपसोमनीषिणोयज्ञेकृण्वन्तिविदथेषुधीरायदपूर्वंयक्षमन्तःप्रजानांतन्मेमनःशिवसङ्कल्पमस्तु
शिवसङ्कल्पमस्तु
यज्जाग्रतोदूरमुदैतिदैवंतदुसुप्तस्यतथैवैतिदूरंगमंज्योतिषांज्योतिरेकंतन्मेमनःशिवसङ्कल्पमस्तु