Wednesday, May 13, 2020
सत्य की खोज
जय श्री गणेश
सत्य की खोज स्वयं में जीवात्मा का एक विषय है
यहाँ बाहर व् भीतर दोनों परिस्थिति के अनुकूल समावेश से साधन सिद्द हो सकता है
वस्तुतः यह आत्मा के सत्य की ही तुलनात्मक खोज है
जो मूलतः जीव के भीतर ही निहित होता है
पर उस तक पहुंचने के लिए बाहिरी विषय भी सहायक होते है
मूलतः शुद्धिकरण परिक्रिया अहम् भूमि निभाती है
जैसे जैसे जीव बाहर व् भीतर शुद्धिकरण को प्राप्त होता है
यह विषय स्वयं ही हल हो जाता है
यह ज्ञान हृदय के मूल पट पर स्प्रष्ट रूप से प्रगट हो जाता है
परमात्मा सभी पर कृपा करे