Wednesday, May 13, 2020
प्रसन्नता
जय श्री गणेश,
प्रसन्नता मानव हेतु वरदान है पर सभी को सभी समय उपलब्ध हो यह सजग विषय है
प्रसन्नता एक मन की स्थिति है जो इसकी अनुकूल गति के निहित वास करती है
जीवन शैली व् समाज की स्तिथि इसको प्रभावित करती है
अभावग्रस्त जीवन प्रसन्नता से कही दूर का विषय है
पर मन को सहज भाव प्रदान कर मानव इसे प्रसन्नता अनुकूल कर सकता है
यहाँ सर्व प्रथम परमात्मा को अपना माने और स्वयं को परमात्मा का
परमात्मा के हो कर अनुकूल जीवन यापन करे
इस सम्बन्ध के प्रति सद्भाव रखे
इस कारण से जीव का नित्य वास देह जनित होते हुए भी परमात्मा में होगा
इस अभ्यास से प्रकृति जीव के अनुकूल होने लगेगी
और जीवन में सुख का संचार स्वतः प्रगट होगा