शिव कृपा
बिंदुक व् उसकी पत्नी चंचुला दोनों ही व्यभिचार युक्त जीवन यापन करते थे बिंदुक को अंत में प्रेत योनी प्राप्त हुई पर चंचुला शिव भक्ति कर शिव लोक गामी हुई वहा पारवती जी की सेवा के सोभाग्य से उसने बिंदुक को भी प्रेत योनी से मुक्ति दिलाई-शिव कृपा की महिमा अपरम्पार है