Sat Guru

Sat Guru
Bhagwan Shiv

Thursday, March 11, 2021

शिव विद्या

 शिव विद्या

एक - ब्रह्म एक है उसी की परिपूर्ण सत्ता है वही     पूजनीय है
दो-जीव व् ब्रह्म, ब्रह्म परिपूर्ण है व् जीव की     परिपूर्णता ब्रह्म से ही रचित है
तीन-ब्रह्म विष्णु महेश- त्रिदेव
       सृष्टी पालन और संघार के कारण करनाये
       सत रज तम-त्रिगुण
       सुख दुःख व् मोक्ष की सीमा
चार-सत्य- दया- ताप- दान {धर्म के चार पद }
      प्रगट धर्म के चार पद कलि मऊ एक प्रदान    येन केन विधि दीन्हे दान कराही कल्याण
      अर्थ धर्म काम मोक्ष
      {मनुष्य जीवन के चार पथ }
पांच-पंच भूत-आकाश अग्नि वायु जल पृथ्वी
      पंच भूतो के पाच गुण
      शब्द दर्शन स्पर्श रस गंध
      पंच कर्म इन्द्रिये
      पंच ज्ञान इन्द्रिये
      पंच मुखी भगवान् शिव
छह-छह मुखी भगवान् कार्तिकेय
सात- सात प्रकाश पिंड- गृह
        सप्त  सागर- सात दिन
        सप्त धातु
आठ -अष्ट मुखी भगवान् शिव
      आठो दिशाओं के अधिष्ठित देव
      अष्टांग योग के कारण कारणाय
नो -नव शक्ति नव दुर्गा
     नव  गृह
     भक्ति के नव अंग
शुन्य-पुन आरम्भ