शिव रात्रि
भगवान् शिव का अदि व् अंत किसी को भी ज्ञात नहीं पर जब एक समय ब्रह्मा व् विष्णु में अन्यथा विवाद हुआ तब प्रभु अग्नि स्तब्ध के रूप में प्रगट हुए तब दोनों का वेग शांत हुआ ब्रह्मा जी आकाश की ओर व् विष्णु जी पातळ की ओर गए किसी को भी अदि व् अंत ना मिला पर ब्रह्मा जी मिद्या को प्राप्त हुए पर विष्णु जी सत्य को मान दिया तब शिव साक्षात् रूप में प्रगट हुए और निज स्वरुप को प्रगट किया वह दिन शिव रात्रि के रूप में प्रसिद्द हुआ शिव रात्रि की महिमा अपरम्पार है यह एक परिपूर्ण भक्ति सरोवर है जहा अमृत का वास है
